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सोमवार, 8 मार्च 2021

हरियाली के खूबसूरत संसार में भी हैं रोजगार के अवसर

 
































भला कौन ऐसा होगा जिसे फूल-पौधों से प्यार न हो? लोगों का बस चले तो पूरा बगीचा ही उठाकर घर ले आएँ! अपने-अपने घरों में गमले सजाकर हम अपनी इसी इच्छा को संतुष्ट करने का प्रयास भी करते हैं। वास्तुशास्त्र में भी अलग-अलग पौधों के विभिन्न लाभ बताए जाते हैं। आमतौर पर छत, पोर्टिको जैसी जगहों पर गमले लगाने का चलन है लेकिन फैशन के इस दौर में बेडरूम, ऑफिस भी इससे अछूते नहीं हैं। किसी खास अवसर पर बुके की जगह एक सुंदर पौधे वाला गमला भेंट करने का प्रयोग भी खूब पसंद किया जाने लगा है।


मनमोहक गमले


गमलों का पारंपरिक रूप जो हम देखते आए हैं, अब बात वहीं तक सीमित नहीं रही है। अवसर और स्थान के अनुसार आपके लिए एक से बढ़कर एक इतने मनमोहक डिजाइन के गमले आ चुके हैं कि देखने वाला वाह-वाह कर उठे! बच्चों के रूम में रखने के लिए खिलौनों के आकार के फ्लावर पॉट्स, ऑफिस के लिए पेन स्टैंड वाले और किचन में सजाने के लिए कॉफी मग की शेप में गमले उपलब्ध हैं। पिछले महीने बीते वैलेंटाइन वीक के दौरान दिल की शेप वाले गमलों की रेंज को काफी पसंद किया गया था। इन गमलों में आप रुचि अनुसार कोई भी प्लांट लगा सकते हैं।

शनिवार, 20 फ़रवरी 2021

ई-कॉमर्स नौकरियों का बड़ा आकाश

कोरोना महामारी के इस दौर में घर से बाहर निकलना कम होने से ऑनलाइन शॉपिंग में अचानक उछाल देखने को मिला है। रिलायंस ने रिटेल सेक्टर की लोकप्रिय कंपनी फ्यूचर ग्रुप को हाल ही में खरीद लिया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इन सब से आने वाले दिनों में रिटेल सेक्टर में अधिक नौकरियां सामने आएंगी, जिसका फायदा युवाओं को मिलेगा। गोल्डमैन की एक ताजा रिपोर्ट भी बताती है कि भारत का ई-कॉमर्स कारोबार साल 2024 तक करीब 99 अरब डॉलर तक हो जाएगा। अगले चार साल में इसकी वृद्धि भी 27 प्रतिशत तक रहने की आशा है।


ई-कॉमर्स कंपनियों की बढ़ती उपयोगिता से एक कॉल पर हमारे घर तक ग्रॉसरी से लेकर फल, सब्जियां, कपड़े, दवाइयां, खाना सबकुछ मिलने लगा है। कोरोना के संक्रमण और शारीरिक दूरी के नियम को देखते हुए माना जा रहा है कि यह शॉपिंग ट्रेंड आने वाले समय में भी जारी रहेगा और लोग अपनी जरूरत की चीजें ऑनलाइन ही मँगाने पर प्रथमिकता देंगे।


बढ़ती डिमांड के कारण आज अमेजन, फ्लिपकार्ट, जोमैटो, जियोमार्ट जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियां लग्जरी ब्रांड के अलावा ऑनलाइन ग्रॉसरी के फील्ड में भी तेजी से आगे आने लगी हैं। देश में नेट यूजर्स का बेस भी लगातार बढ़ता जा रहा है। ऑनलाइन शॉपिंग में यहाँ के लोगों ने चीन, ब्राजील, इंडोनेशिया, थाईलैंड और फिलीपींस जैसे देशों से भी ज्यादा तेजी दिखाई है। ई-कॉमर्स में आए इस बूम के कारण आने वाले दिनों में डिलीवरी ब्वॉय से लेकर सप्लाई चेन मैनेजमेंट, कंटेंट डेवलपमेंट, रिटेल मैनेजमेंट, मार्केटिंग तथा फाइनेंस में प्रशिक्षित लोगों के लिए कहीं ज्यादा अवसर होंगे।


कोरोना काल में जहाँ कई सेक्टर्स में लोगों की नौकरियाँ जाने का डर हावी हुआ है, वहीं इसके उलट ई-कॉमर्स की डिमांड में काफी तेजी आई है। खासतौर से पिछले छह महीने से डिलीवरी ब्वॉय की जबरदस्त डिमांड है। इन दिनों सेल्स, लॉजिस्टिक्स तथा कंटेंट डेवलपमेंट स्किल वाले लोगों की बड़े पैमाने पर हायरिंग की जा रही है। यह हायरिंग अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्वीगी, बिग बॉस्केट तथा पेटीएम जैसी सभी ऑनलाइन कंपनियों में देखी जा रही है।

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021

प्रोडक्ट मैनेजमेंट में ढेरों अवसर

आज का समय ऐसा है कि किसी भी उद्यम की सफलता में प्रोडक्ट इनोवेशन एवं ग्राहकों का अनुभव बहुत महत्व रखने लगा है, जिसके कारण इन दिनों कंपनियों में प्रोडक्ट मैनेजर्स की मांग बढ़ गई है, विशेषकर आईटी सेक्टर की कंपनियों में। आप किसी भी जॉब पोर्टल पर जाएँ, प्रोडक्ट मैनेजमेंट करने वालों के लिए खूब मौके दिखाई देते हैं। प्रोडक्ट मैनेजमेंट वह फील्ड है जिसमें किसी भी आइडिया को प्रोडक्ट में बदलना और उसका पूरा रोडमैप तैयार करना सिखाया जाता है।


अपने देश में कुछ वर्ष पहले तक प्रोडक्ट डेवलपमेंट, मैनेजमेंट और मार्केटिंग का उतना चलन नहीं था किन्तु जोहो, इनमोबी, फ्रेशडेस्क, जोमैटो, फ्लिपकार्ट, मेक माई ट्रिप जैसे प्रोडक्ट इनोवेशन स्टार्टअप्स के आने के बाद से इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। विशेषज्ञों की मानें, तो जिन कंपनियों में स्ट्रॉन्ग प्रोडक्ट मैनेजर्स की टीम होती है, वे नए बिजनेस मॉडल क्रिएट करने के साथ ही टेक्नोलॉजी इनोवेशन को प्रोत्साहित करते हैं।


प्रोडक्ट मैनेजर किसी भी प्रोडक्ट का मुख्य कार्यकारी होता है। वह प्रोडक्ट से संबंधित हर फैसले लेता है यानी प्लानिंग करने, रणनीति बनाने, डिजाइनिंग करने से लेकर सेल्स, मार्केटिंग, ऑपरेशंस, फाइनेंस, कस्टमर सक्सेस, प्रोडक्ट की डिलीवरी जैसी सारी जिम्मेदारी प्रोडक्ट मैनेजर की होती है। अच्छे प्रोडक्ट मैनेजर्स वही माने जाते हैं, जो टेक्नोलॉजी के प्रयोग एवं उसके प्रभाव को अच्छी तरह से समझते हों। इन दिनों डाटा की महत्ता बढ़ने से प्रोडक्ट मैनेजर्स की भूमिका और भी बढ़ गई है।


बेसिक स्किल्स


एक प्रोडक्ट मैनेजर का ज्यादातर समय स्ट्रेटेजी बनाने एवं आकलन करने में निकलता है। वह जानने का प्रयास करता है कि ग्राहकों की अमुक उत्पाद के प्रति क्या प्रतिक्रिया या फीडबैक है, ताकि वह अपने ग्राहकों की पसंद-नापसंद को अच्छे से जान सकें और उसके अनुरूप प्रोडक्ट को और बेहतर बना सकें।

प्रोग्रामिंग - संभावनाओं की भरमार

आज के समय में जब गेम्स, एप्स, रोबोट्स, ऑटोनोमस कार आदि के रूप में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का दखल हमारे जीवन में बढ़ता जा रहा है, वैसे में प्रोग्रामिंग के फील्ड में करियर बनाना आपका भविष्य निखार देगा। एंड्रॉयड डेवलपमेंट, इंस्टाग्राम, नेटफ्लिक्स तथा माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस सूट इत्यादि के इस्तेमाल में जावा, पाइथन या सी प्लस प्लस जैसे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।


कंप्यूटर का सारा काम प्रोग्रामिंग के जरिए ही होता है। प्रोग्रामिंग या कोडिंग के द्वारा ही कंप्यूटर को बताया जाता है कि उसे क्या करना है? कोडिंग जाननेवाले आसानी से वेबसाइट अथवा ऐप डेवलप कर सकते हैं। स्किल्ड नेशन की प्रतिबद्धता पूरी करने के लिए नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी एनएसडीसी के ई-स्किल पोर्टल ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ साझेदारी की है। इसके अंतर्गत अगले बारह महीने में एक लाख से अधिक युवाओं को डिजिटल स्किल्स में प्रशिक्षित किया जाएगा। माइक्रोसॉफ्ट लर्निंग रिसोर्स सेंटर, माइक्रोसॉफ्ट लर्न एवं ई-स्किल डिजिटल प्लेटफॉर्म की सहायता से युवा कहीं बैठे नि:शुल्क कस्टमाइज्ड लर्निंग रिसोर्स एवं कंटेंट प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा, डिजिटल स्किलिंग अवेयरनेस ड्राइव (वेबिनार, वर्चुअल सेशन, ई-स्किलिंग इवेंट्स) चलाए जाएंगे, ताकि अगली पीढ़ी को डिजिटल इकोनॉमी के लिए बेहतर रूप से तैयार किया जा सके।


वैसे तो किसी भी बैकग्राउंड, स्ट्रीम के युवा कोडिंग सीख सकते हैं लेकिन कंप्यूटर साइंस, वेब डेवलपमेंट, प्रोग्रामिंग, इंफॉर्मेशन सिस्टम आदि में ग्रेजुएशन करना और भी अच्छा रहता है। आगे बढ़ने के लिए आपकी सी, सी प्लस प्लस, जावा स्क्रिप्ट, एचटीएमएल, सीएसएस, पीएचपी, जावा, हेलो, पाइथन जैसे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज पर पकड़ होनी चाहिए। प्रोग्रामिंग घर बैठे एप या ऑनलाइन माध्यमों से भी सीखी जा सकती है।

भविष्य का सपना और मार्केटिंग का डिजिटल मंच

आज रोजगार के क्षेत्र में जिस तरह का वातावरण बना है, उसे देखते हुए डिजिटल मार्केंटिंग के लिए अवसर बहुत बढ़ गये हैं। डिजिटल होते युग को देखकर जानकारों ने पहले से ही इसे भविष्य का एक चमकदार करियर ऑप्शन बता दिया था। आने वाला कल इंटरनेट का है और इसलिए कंपनियां भी अपनी ऐड कैंपेन को इंटरनेट पर ही ज्यादा आगे बढ़ाना चाहेंगी। आज शायद ही कोई कंपनी हो, जो डिजिटल मार्केटिंग की सहायता न ले रही हो। कई कंपनियां तो अपनी बजट का पचास प्रतिशत हिस्सा इस पर खर्च कर रही हैं।


किनके लिए है यह कोर्स


इन दिनों डिजिटल मार्केटिंग अपने ऑडिएंस से ऑनलाइन जुड़ने का एक बड़ा माध्यम बन चुका है। इसके अंतर्गत सोशल मीडिया मार्केटिंग, सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन, पेड ऐड्स, पीआर ऑनलाइन सोर्सेज, ब्लॉग्स, कंटेंट मार्केटिंग, ईमेल मार्केटिंग, एसएमएस मार्केटिंग आदि आते हैं। अगर आप भी टेक सेवी हैं और टेक्नोलॉजी में एक अच्छा भविष्य बनाना चाहते हैं तो यह फील्ड आपके लिए है। प्रिंट, बैनर्स, पोस्टर्स, फ्लायर्स आदि की तुलना में डिजिटल ऐड्स की पहुंच कहीं बड़े ऑडियंस तक होती है, क्योंकि कोई भी अपने मोबाइल फोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी अथवा टैबलेट पर इन विज्ञापनों को देख सकता है। इसलिए अधिकतर कंपनियां अपनी मार्केटिंग रणनीति, इंटरनेट को ध्यान में रखकर बनाती हैं। आने वाले साल इंटरनेट के होंगे और इसमें डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट्स की अच्छी डिमांड होगी।

दवा की दुनिया में भी कई अवसर

अगर आपकी रुचि दवाओं में है तो आपके लिए इस समय तेजी से बढ़ने वाले सेक्टर्स में हेल्थ का नाम भी है। आज की कोरोना महामारी को देखते हुए मेडिकल, पैरामेडिकल और इस सेक्टर से जुड़े कारोबारों का तेजी से विकास होने की सम्भावना है। इसी से जुड़ा फार्मासूटिकल्स का क्षेत्र भी इस समय बड़े अवसर देने वाला माना जा रहा है। विभिन्न रोगों में लाभ पहुंचा सकने वाली उपयोगी दवाओं की खोज या डिवेलपमेंट में दिलचस्पी रखने वाले लोग फार्मेसी सेक्टर से सम्बन्धित विभिन्न कोर्स कर इस सेक्टर में करियर बना सकते हैं। यहां नई-नई दवाइयों की खोज व विकास संबंधी कार्य किया जा सकता है। साथ ही अपने व्यापार का स्कोप तो होगा ही।


विभिन्न कोर्स एवं आवश्यक योग्यता


बारहवीं के बाद - बीफार्मा, बीफार्मा लैटरल एंट्री, डिप्लोमा इन फार्मेसी, बैचलर ऑफ फिजियोथेरपी

डिप्लोमा इन फार्मेसी (डीफार्मा) - यह दो वर्षीय (चार सेमेस्टर का) डिप्लोमा कोर्स है और इसके लिए स्टूडेंट्स को साइंस स्ट्रीम में बारहवीं पास होना चाहिए।

बैचलर ऑफ फार्मेसी (बीफार्मा) - ये चार वर्षीय (आठ सेमेस्टर का) अंडरग्रैजुएट कोर्स है। इसके लिए भी आपको साइंस स्ट्रीम में बारहवीं पास होना चाहिए।

बैचलर ऑफ फिजियोथेरपी (बीपीटी) - यह चार वर्षीय (आठ सेमेस्टर का) ग्रैजुएशन कोर्स है। इसके साथ ही स्टूडेंट्स को छह माह की जरूरी क्लिनिकल इंटर्नशिप भी करनी होती है। इसके लिए साइंस स्ट्रीम में बारहवीं पास होना चाहिए।

मास्टर ऑफ फार्मेसी (एमफार्मा) - यह दो वर्षीय स्नातकोत्तर कोर्स है। इसके लिए स्टूडेंट्स को बीफार्मा होना चाहिए।


इस फील्ड की मुख्य शाखाएं

रोबोटिक्स इंजीनियरिंग में बेहतर भविष्य

देश-दुनिया में जिस तरह से मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल से लेकर हर सेक्टर में ऑटोमेशन बढ़ा है और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए रोबोटिक्स, एआई एवं मशीन लर्निंग की सहायता ली जाने लगी है, उसे देखते हुए कोई संदेह नहीं कि आने वाले समय में रोबोटिक्स के कुशल प्रोफेशनल्स की माँग तेज होगी। कोरोना काल में उत्पन्न हुई परिस्थितियों ने तो अस्पतालों, एयरपोर्ट, मॉल्स, फूड एवं बेवरेज इंडस्ट्री में भी इनका प्रयोग और अधिक बढ़ा दिया है।


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स के विद्वान और फ्यूचरिस्ट मार्टिन फ़ोर्ड का भी मानना है कि कोविड-19 के प्रभाव से उपभोक्ताओं की प्राथमिकताएँ बदलेंगी और ऑटोमेशन के नये अवसर खुलेंगे। अपनी हर गतिविधि में इंसानी अहसास ढूँढने की मानसिकता लोगों में बदल रही है। अमेरिका की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी वालमार्ट ने अपने यहाँ फ़र्श साफ करने के लिए तो दक्षिण कोरिया में तापमान लेने और सैनिटाइजर बांटने के लिए भी रोबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इतना ही नहीं, अस्पतालों में तैनात कई रोबोट्स में लगे ऑडियो व वीडियो डिवाइस, सेंसर्स, 3डी, एचडी कैमरे से डॉक्टर मरीज से बातचीत कर सकते हैं। यहां तक कि आइसोलेशन वार्ड में ऊब रहे मरीज इसके माध्यम से समय-समय पर अपने रिश्तेदारों से भी संपर्क कर सकने की सुविधा है। साथ में ड्रोन्स का भी काफी उपयोग होता देखा गया। महामारी के बाद के दौर में ऑटोमेशन, एआई एवं रोबोट्स की डिमांड और भी बढ़ेगी। इसलिए जिन स्टूडेंट्स की इस सेक्टर में रुचि है, वे खुद को आने वाले समय के लिए बेहतर तैयार कर सकते हैं। उनके लिए कई स्तरों पर मौके होंगे।

लाइव क्लासेज़ से परीक्षा की तैयारी

 













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होम ऑफिस के गैजेट्स

 












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जेईई मेन की तैयारी एप से

 












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वर्चुअल इंटरव्यू - ऐसे करें तैयारी

 















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