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बुधवार, 3 मार्च 2021

दोहों के 23 प्रकार | dohe ke prakar | दोहा में मात्रा कैसे गिनते है

 "दोहा क्या है", "दोहे कैसे लिखे जाते हैं", "मात्रा गणना क्या है" इत्यादि विषयों पर आपलोगों ने मेरी पिछली पोस्ट्स को खूब पसंद किया और बहुतों ने मुझे व्यक्तिगत रूप से बताया कि उनको दोहा लिखना समझ आने लगा है। आज इस पोस्ट में मैं आपलोगों को दोहे से जुड़ी एक और रोचक बात बताऊँगा कि "दोहा कितने प्रकार का होता है"। आइए, देखते हैं।


दोहा, रोला, चौपाई, बरवै या कोई भी छंद हो, सब में मात्रा गणना और मात्रा संयोजन प्रमुख है। दोहे के जिन तेईस प्रकारों की यहाँ मैं बात करने जा रहा हूँ, वह भी दोहे में लघु-गुरु मात्राओं की संख्या पर ही आधारित है। 


१ - भ्रमर दोहा (२२ गुरु, ४ लघु)

२ - सुभ्रामर दोहा (२१ गुरु, ६ लघु)

३ - शरभ दोहा (२० गुरु, ८ लघु)

४ - श्येन दोहा (१९ गुरु, १० लघु)

५ - मंडूक दोहा (१८ गुरु, १२ लघु)

६ - मर्कट दोहा (१७ गुरु, १४ लघु)

७ - करभ दोहा (१६ गुरु, १६ लघु)

८ - नर दोहा (१५ गुरु, १८ लघु)

९ - हंस दोहा (१४ गुरु, २० लघु)

१० - गवंद या मदुकल दोहा (१३ गुरु, २२ लघु)

११ - पयोधर दोहा (१२ गुरु, २४ लघु)

१२ - चल या बल दोहा (११ गुरु, २६ लघु)

१३ - वानर दोहा (१० गुरु, २८ लघु)

१४ - त्रिकल दोहा (९ गुरु, ३० लघु)

१५ - कच्छप दोहा (८ गुरु, ३२ लघु)

१६ - मच्छ दोहा (७ गुरु, ३४ लघु)

१७ - शार्दूल दोहा (६ गुरु, ३६ लघु)

१८ - अहिवर दोहा (५ गुरु, ३८ लघु)

१९ - ब्याल दोहा (४ गुरु, ४० लघु)

२० - विडाल दोहा (३ गुरु, ४२ लघु)

२१ - श्वान दोहा (२ गुरु, ४४ लघु)

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2021

बरवै छंद कैसे लिखें । वीडियो ट्यूटोरियल के साथ । Barvai kaise likhe

बरवै छंद भी दोहा की तरह अर्धसम मात्रिक छंद होता है। जिसके चार चरण और दो पद होते हैं। प्रत्येक पद १९-१९ मात्राओं का होता है। चारों चरणों की बात करें तो प्रथम-तृतीय (विषम चरण) १२-१२ मात्राओं के होते हैं, और द्वितीय-चतुर्थ (सम चरण) ७-७ मात्राओं के होते हैं। इस प्रकार दोनों पदों की १९-१९ मात्राएँ हो जाती हैं।


इस छंद के आंतरिक मात्रा संयोजन में विषम चरणों की मात्रा बाँट ८+४ तथा सम चरणों में ४+३ होती है। दोनों पदों का अंत पताका (२१) से होता है। अच्छा रहेगा कि पदांत जगण (१२१) से किया जाए। अन्यथा तगण (२२१) से भी कर सकते हैं। मात्रा गणना के बारे में अगर आपको जानकारी नहीं है, तो इसी ब्लॉग पर आप मात्रा गणना से संबंधित पोस्ट पढ़ सकते हैं। ऊपर मेनू में "लेखन सीखें" पर क्लिक कर के विभिन्न विधाओं की जानकारी मिल जाएगी। 


बरवै का उदाहरण देखिए - 


टूटी-फूटी सड़कें, करें गुहार।

थोथे भाषण मत दे, हमें सुधार॥


बरवै छंद का वीडियो ट्यूटोरियल देखना चाहें तो देख सकते हैं। लगा रहा हूँ -



सोमवार, 8 फ़रवरी 2021

नव वर्ष विशेष दोहे


दिल फिर सोलह का हुआ, आशाएँ उन्नीस। 

देख मुस्कुराने लगा, दो हजार इक्कीस॥ 


बाइस अभी भविष्य में, बीस हुआ इतिहास। 

वर्तमान इक्कीस है, इस से ही सब आस॥ 


तन उपवन सा हो गया, सपने हुए गुलाब। 

नये वर्ष के संग हम, पढ़ते प्रेम-किताब॥ 


जो बीता, उसको नमन, उसका भी आभार। 

नये वर्ष को दीजिए, आशा का उपहार॥ 


नये वर्ष को क्या कहें? नयी डाल का फूल! 

मिल-जुलकर सींचें इसे, यही सुखों का मूल॥ 


 

गुरुवार, 31 दिसंबर 2020

लावणी, कुकुभ और ताटंक छंद - वीडियो ट्यूटोरियल

 तीनों छंदों का वीडियो ट्यूटोरियल यहाँ देखें










लावणी, कुकुभ और ताटंक, ये तीनों छंद लगभग समान शिल्प के हैं और महीन अंतर का भेद होता है। अंतर क्या है? ये आपको इस वीडियो में स्पष्ट हो जाएगा।

शनिवार, 31 अक्टूबर 2020

उल्लाला छंद लिखना सीखिए (वीडियो ट्यूटोरियल के साथ)

उल्लाला छंद की बात करें तो यह चार चरणों तथा दो पदों का छंद है। इसको दो प्रकार से लिखा जा सकता है-


(१) १३,१३ मात्राओं के दो पदों वाला उल्लाला

(२) १५, १३ मात्राओं के दो पदों वाला उल्लाला


इन दोनों ही प्रकारों में जो १३-१३ मात्राओं वाला भाग है, उसका मात्रा संयोजन दोहे के विषम चरणों की तरह होता है। यदि आपने दोहे से सम्बन्धित मेरी पोस्ट नहीं पढ़ी हो, तो आप उसे इसी ब्लॉग पर पिछली पोस्ट्स में पढ़ सकते हैं। उल्लाला के १५ मात्राओं वाले भाग का मात्रिक संयोजन भी १३ मात्राओं वाले भाग की तरह होता है किन्तु उसके आरम्भ में एक द्विकल जोड़ दिया जाता है, जिससे कि वह १५ मात्राओं का हो जाए।


मात्रा गणना और मात्रा संयोजन दोनो ही विषयों पर मेरी पोस्ट्स इसी ब्लॉग पर हैं और साथ में सबका वीडियो ट्यूटोरियल भी मैंने लगाया है। उल्लाला के दोनों प्रकारों में तुकांतता की बात करें तो १३, १३ मात्राओं वाले उल्लाला के सम चरण तुकांत होते हैं अथवा आप चाहें तो विषम-सम चरण भी तुकांत कर सकते हैं। १५, १३ मात्राओं वाले उल्लाला में केवल सम चरणों का तुक चलता है।

गुरुवार, 29 अक्टूबर 2020

मुक्तक कैसे लिखें (वीडियो ट्यूटोरियल के साथ)

 मित्रों को सादर नमस्कार


आज बात करते हैं कवि सम्मेलनों की लोकप्रिय विधा "मुक्तक" पर। मित्रों, मुक्तक, कविता की वह विधा है जो प्रबन्धकीयता से मुक्त होती है। जैसे आपने खण्डकाव्य या महाकाव्य जो कि प्रबन्ध काव्य के ही प्रकार हैं, पढ़े होंगे। इनमें लिखा गया हर छंद या पद, किसी निश्चित विषय से बंधा होता है और उसी विषय का वर्णन पूरे काव्य में होता है। 


इसके ठीक विपरीत मुक्तक काव्य में एक छन्द में कथित बात का दूसरे छन्द में कही गयी बात से कोई सम्बन्ध नहीं होता है। रहीम के दोहे या मीराबाई के पद्य, ये सभी मुक्तक काव्य के उदाहरण हैं। हाँ, कवि सम्मेलनों में हमलोग मुक्तक का एक विशिष्ट रूप देखते हैं जो कि चार पंक्तियों का होता है। पहली, दूसरी और चौथी पंक्तियाँ समतुकांत होती हैं और तीसरी पंक्ति अनिवार्य रूप से अतुकांत होती है। यह लोक प्रचलित मुक्तक है। इस पोस्ट में हम इसी लोक प्रचलित मुक्तक के शिल्प पर बात करेंगे।

बुधवार, 28 अक्टूबर 2020

कुंडलिया छंद कैसे लिखें (वीडियो ट्यूटोरियल के साथ)

 मित्रों को सादर नमस्कार


आज बात करते हैं कुंडलिया छंद की। मित्रों, कुंडलिया छंद, दोहा और रोला के योग से बनता है। यह छः पदों का छंद है, जिसमें पहली दो पंक्तियाँ दोहे के शिल्प पर होती हैं और बाकी चार, रोले पर। कुंडलिया छंद में जिस शब्द/ शब्द समूह से छंद का आरंभ होता है, उसी से उसका समापन भी किया जाता है। इसके अलावा, कुंडलिया का चौथा चरण, हूबहू उसका पाँचवा चरण भी बन जाता है। इसी ब्लॉग पर मैंने दोहा, मात्रा गणना, मात्रा संयोजन आदि पर भी पोस्ट लिखे हैं, साथ में उनका वीडियो ट्यूटोरियल भी उसी पोस्ट में लगाया हुआ है। आप चाहें तो देख सकते हैं।


कुंडलिया छंद का उदाहरण नीचे दे रहा हूँ -


गुरुवार, 17 सितंबर 2020

सोरठा छंद क्या है? (वीडियो ट्यूटोरियल के साथ)

 सभी मित्रों को सादर नमस्कार


आज पुनः आपके समक्ष उपस्थित हूँ नये छंद के साथ, जो है सोरठा छंद। इस छंद को समझने के लिए उन्हें कोई विशेष श्रम नहीं करना पड़ेगा, जिन्होंने मेरी दोहे से सम्बन्धित पिछली पोस्ट पढ़ी है। यदि आपने नहीं पढ़ी तो आपसे निवेदन है कि पढ़ लें। सोरठा छंद, दोहे का ठीक उल्टा होता है। देखिए उदाहरण,


दोहा 


दुष्ट गरीबी है बहुत, घोटालों में तेज।

लिये बालपन को गयी, दिया बुढ़ापा भेज॥

सोमवार, 14 सितंबर 2020

दोहा कैसे लिखें? (वीडियो ट्यूटोरियल के साथ)

 साथियों नमस्कार


मैं एक बार पुनः आपके समक्ष प्रस्तुत हूँ छंद लेखन पर नयी पोस्ट के साथ। जैसा कि आप अब तक समझ चुके होंगे कि मेरा प्रयास यही रहता है कि बिना किसी कठिन साहित्यिक भाषाशैली के बिना सरल से सरल शब्दों में आप तक छंद लेखन की जानकारियाँ पहुँचाऊँ। 


मित्रों, छंद वेदों से जुड़ा विषय है। हमारे सनातन धर्म का और इस सृष्टि का अभिन्न अंग है। इस बात को हमेशा स्मरण रखें और अपने समृद्ध छंदों और इस परंपरा पर गर्व करें।


आज बात करते हैं दोहा छंद की। इसके शिल्प की कहें तो दोहा अर्धसम मात्रिक छंद है। अर्धसम से अभिप्राय है कि इसके चार चरण समान नहीं होते। जिन छंदों के सभी चरण समान मात्राभार और मापनी का पालन करते हैं, वे सम छंद कहलाते हैं। दोहा के पहले-तीसरे चरणों में १३-१३ मात्राएँ होती हैं और दूसरे-चौथे चरणों में ११-११ मात्राएँ मिलती हैं। अब देखिए कि दोहा लिखा कैसे जाता है। 

शनिवार, 12 सितंबर 2020

मात्रा संयोजन कैसे करें? (वीडियो ट्यूटोरियल के साथ)

 सभी मित्रों को सादर नमस्कार


आपके समक्ष आज मात्रा संयोजन विषय को रख रहा हूँ। आशा है कि इससे आपको गीत-नवगीत, छंद, गीतिका इत्यादि लिखते समय पंक्तियों को लयबद्ध करने में सुगमता होगी। मैं यहाँ मानकर चल रहा हूँ कि आपको मात्रा गणना की पूरी समझ हो चुकी है। आपसे निवेदन है कि यदि आपको मात्रा गणना की जानकारी नहीं है तो इस पोस्ट को पढ़ने से पहले इसी ब्लॉग पर पिछली पोस्ट जो कि मात्रा गणना पर है, उसे पूरा पढ़कर समझ लें। तो आइए आरंभ करते हैं।


मात्रा संयोजन क्या है?


मित्रों, कोई भी वैसी विधा जो कि मात्राओं पर आधारित हो, उसे लिखने के लिए केवल मात्रा गणना की जानकारी ही पर्याप्त नहीं होती। शब्दों को उनके मात्राभार के अनुसार सही क्रम में सजाना भी आवश्यक होता है। जैसे एक उदाहरण देखिए -


नयन निहारें आपको, हृदय आपका दास.........(१)

निहारें नयन आपको, आपका हृदय दास.........(२)


दोनों पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए और उच्चारण करिए। ये दोहा की पंक्ति है। समान भाव एवं मात्राभार के बाद भी आप स्वयं पाएँगे कि (१) में गति (२) की तुलना में अधिक है। ऐसा क्यों? देखिए बताते हैं।

शुक्रवार, 11 सितंबर 2020

मात्रा गणना क्या है? (वीडियो ट्यूटोरियल के साथ)

 सभी मित्रों को सप्रेम नमस्कार


छंद सीखना बहुत से लोगों की इच्छा होती है और ऐसे में जो अध्याय सबसे पहले मिलता है, वह है मात्रा गणना। दोस्तों, मात्रा गणना बहुत सरल है। परस्पर सीखने-सिखाने के इस ब्लॉग पर मेरा प्रयास यही रहेगा कि यथासंभव जितनी मुझे जानकारी है, उसके अनुसार आपको कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक बिंदुओं को चर्चा हेतु दिखला सकूँ। आइए देखते हैं -


किसी भी वर्ण के उच्चारण में जो समय लगता है, उसे मात्रा कहते हैं। हिन्दी छंद लेखन में मात्राएँ दो प्रकार की मानी जाती हैं


(१) लघु

(२) गुरु


गुरु मात्रिक वर्ण के उच्चारण में लघु मात्रिक वर्ण की तुलना में दुगुना समय लगता है। अब यहाँ प्रश्न ये उठता है कि इन मात्राओं को पहचानें कैसे? तो साथियों, ये बहुत ही आसान है। मात्राएँ स्वरों के अनुसार निर्धारित होती हैं।

रविवार, 2 अगस्त 2020

घनाक्षरी (होली विशेष)

लाल, पीले, हरे सभी, संग-संग झूम रहे, खुशियों ने कामना की दुनिया सजायी है।
जम के उड़ा रही गुलाल छत बावरी तो बूढ़े अँगना को याद यौवन की आयी है।
मालपुआ सबको मिठास बाँटने में जुटा, सपनों ने किलकारी जम के लगायी है।
रंग ही तुम्हारा हाय! लगा नहीं मुझ को तो, कैसे कहे दिल मेरा, मेरी होली आयी है॥

कौन सी वो पिचकारी, कौन सा गुब्बारा होगा, भर कर तुमको जो मुझ पर डाल दे।
कहाँ होगा ढोलक वो, कदमों को तुम्हारे जो, साथ मेरे थिरकाने वाली मस्त ताल दे।
मुख को तलाश उस गुझिया की जिसको हो स्वाद मिला तुमसे, जो मुझको सम्हाल दे।
खोज का भँवर, होली डूबी जाती, चीख रही, साथी! ख्याल उसका तू चित्त से निकाल दे॥

रंगों ने सिंगार तो किया पर आधा-अधूरा, आ के अपनी कला से उसको निखार दो।
गीत फाग वाले जरा छंद से भटक रहे, गोद में बिठाओ उन्हें, उनको सँवार दो।
चूड़ी-पायलों की टोली व्यग्र है खनकने को, मनुहार कर रही, कुछ तो दुलार दो।
जीवन का कैनवास, श्वेत-श्याम चित्र मेरा, इस होली लगे हाथ मुझे भी उबार दो॥

रविवार, 26 अगस्त 2018

राष्ट्रवंदना (पंचचामर छंद)





















प्रणाम मातु भारती, प्रणाम भूमि वत्सला।
ममत्व, सौख्य दायिनी, सुरम्य, सौम्य, उज्ज्वला।
विचार, भाव वेद के, पवित्रता पुराण की।
अनन्य शौर्य शक्ति का व धार शंभु-बाण की॥

शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

माँ के आँचल के तले (कुंडलियाँ)





















1. प्यारा सा उद्यान

पथ पर मेरे यदि कहीं, पड़ता रेगिस्तान।
माँ ले आती ढूँढ के, प्यारा सा उद्यान॥

प्यारा सा उद्यान, संग उसके चलता है,
मेरा हर इक स्वप्न, जहाँ हँस-हँस पलता है।

देती जब वो हाँक, सारथी बन मेरा रथ,

मंगलवार, 17 जुलाई 2018

माहिया छंद

(1)
होठों को अब खोलें
सावन आया है
हम भी उपवन हो लें

(2)
नदिया उफनाई है
सावन ने बाँटी
सबको तरुणाई है

(3)
हरियाली कर देगी
प्रीत घटाओं से

जनता की तकदीर

तुमको प्यारा है गगन, मुझको मेरा नीड़।
इस रिश्ते को देखना, खा जाएगी भीड़॥

नेताजी ने दी बदल, जनता की तकदीर।
भैंसा देकर बोलते, दूहो जीभर क्षीर॥

"जेल" शब्द ही संक्रमित, कहते दृश्य तमाम।
सुनते नेताजी कहें, मुझको दस्त, जुकाम॥

जहाँ प्रेम का संग था, दीखे दृश्य सुखांत।
एकाकीपन को मिला पुनः मौन, एकांत॥

असंतुष्ट ही दीखता, जबकि उड़े हर रोज।

सिसक रहा इतिहास

शहर रेत, सीमेंट का, जल उठता हर रात।
गाँव इसे चंदा समझ, जला बैठते गात॥

दुष्ट गरीबी है बहुत, घोटालों में तेज।
लिये बालपन को गयी, दिया बुढ़ापा भेज॥

नित्य सुने "आगे बढ़ो" लेकिन गहे न सीख।
व्यर्थ नष्ट कर स्वेद-जल, माँग रहा है भीख॥

देख पथिक का आत्मबल, पथ भी डटा तुरंत।
सभी दुराहों का किया, अपने हाथों अंत॥

मैं बसंत का फूल था, तुम सावन की बूँद।

जलती है फिर आग

करवाऊँ मैं क्यों भला, सागर अपने नाम।
अंतस को ही जब यहाँ, कुछ घूँटों से काम॥

रोज सिमटते दायरे, कहते इक ही बात।
दिन होंगे सबके अलग, अलग घिरेगी रात॥

महलों में ही काटकर, नर्म, मखमली रात।
चलती एसीरूम में, फुटपाथों की बात॥

चंदा की मुस्कान है, थोड़ी-थोड़ी मंद।
तारों का ये कार्यक्रम, आया नहीं पसंद॥

टूटा तारा एक फिर, उफ किस्मत का खेल।

गढ़ते गीत अनूप

बीता बचपन चाहता, झट आए वह रेल।
यौवन जिसपर बैठकर, देखे बाकी खेल॥

शब्द कहाँ अब आपके, गढ़ते गीत अनूप।
जिनमें दिखता था मुझे, केवल मेरा रूप॥

नहीं रेशमी वस्त्र पर, खादी का कुछ जोर।
अतः बताया जा रहा, मारकीन को चोर॥

कटु वचनों में आपके, जितना दिखा प्रवाह।

"चप्पल" को तारीख

कुछ आँखों के नीर को, सुखा सका न अकाल।
तभी अभी तक गाँव का, ठीक-ठाक है हाल॥

पढ़ी किताबें खूब, अब सबक आखिरी सीख।
मिले जमानत "बूट" को, "चप्पल" को तारीख॥

बजता बिगुल चुनाव का, कहता है बेबाक।
रिश्ते पनपेंगे कई, होंगे खूब तलाक॥

ये काजल की कोठरी, लगें न कैसे दाग।
झाड़ू लेकर था घुसा, निकला बनके काग॥

सत्ता की ये चाँदनी, मदमाती, चितचोर।