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मंगलवार, 17 जुलाई 2018

हाइकु

(1)
काल सुनार
मनुष्य कैसा स्वर्ण
करे परख

(2)
कहता काठ
बढ़ई बड़ा क्रूर
उधेड़े खाल

(3)
करता याद
दरवाजे का काठ

हाइकु

(1)
सहे छप्पर
जाड़े के अत्याचार
दीन भाव से

(2)
चाँद सुनाता
रात भर तारों को
रोचक किस्से

(3)
पौन डाकिया
भँवरों तक लाया
पुष्पों की पाती

(4)
क्रुद्ध कपाट
चपल खिड़कियाँ

शुक्रवार, 30 मई 2014

मुक्त उड़ान-हाइकु के क्षेत्र में एक नया हस्ताक्षर कुमार गौरव अजीतेन्दु - समीक्षा - ऋता शेखर 'मधु'

मेरे प्रथम हाइकु संकलन "मुक्त उड़ान" की समीक्षा आदरणीया ऋता दी के द्वारा.......



मुक्त उड़ान-हाइकु के क्षेत्र में एक नया हस्ताक्षर कुमार गौरव अजीतेन्दु

शुक्तिका प्रकाशन, कोलकाता द्वारा प्रकाशित हाइकु संग्रह 'मुक्त उड़ान' पढ़ने को मिली| यह युवा हाइकुकार कुमार गौरव अजीतेन्दु जी का एकल हाइकु संग्रह है| पुस्तक के नाम के अनुसार हाइकु परिंदों ने सचमुच में मुक्त उड़ान लगाई है| हर भाव, हर क्षेत्र, हर परिस्थिति , हर उम्र के हाइकु चुनकर लाए हैं अजीतेन्दु के भाव परिंदों ने| पुस्तक का मूल्य मात्र १००/- है| भूमिका के रूप में अपना आशीष भरा हाथ तरुण हाइकुकार के सिर पर रखा है उत्कृष्ट साहित्यकार आचार्य संजीव वर्मा सलिल जी ने| पूरे ५०० हाइकु वाली पुस्तक पढ़ते हुए मैं कई स्थानों पर स्तब्ध रह गई अजीतेन्दु की परिपक्व सोच पर| कहते हैं न कि युवा पीढ़ी में असीम संभावनाएँ होती हैं वह नवहाइकुकार की रचनाओं में प्रत्यक्ष प्रतीत होती है| अवलोकन करते हैं उनके हाइकु काव्यों का जो आपको भी अचंभित किए बिना न रहेंगे|

कोई भी अनजानी राह पर पथिक का डरा हुआ मन ऐसे ही बोलेगा|


पुस्तक परिचय - मुक्त उड़ान (हाइकु संकलन)






















पुस्तक :  मुक्त उड़ान

विधा : हाइकु (500 हाइकु संकलित)

प्रकार : पेपरबैक

पृष्ठ : 108

संस्करण : प्रथम

मूल्य : 100/- रुपये (कोई डाकखर्च नहीं)

लेखक : कुमार गौरव अजीतेन्दु

भूमिका : आचार्य संजीव वर्मा "सलिल"

आईएसबीएन : 978-81-925946-8-2

प्रकाशक : शुक्तिका प्रकाशन, कोलकाता