समोसा, अपने देश में हरेक वर्ग के लोगों में लोकप्रिय है। चाहे जो भी अवसर हो, इसका अपना एक अलग स्थान है। फास्ट फूड से लेकर जंक फूड के दौर में भी समोसे के प्रति हमारा लगाव कभी कम नहीं हुआ। चौक-चौराहे के ठेलों और फाइव स्टार होटलों तक में मिलने वाला समोसा, 10वीं शताब्दी से पहले कहीं मध्य पूर्व में पहलीबार बनाया गया था। इसे ईरान के प्राचीन साम्राज्य से जुड़ा माना जाता है। समोसा नाम फारसी शब्द 'सम्मोकसा' या 'संबुश्क' से निकला है और पहली बार इसका उल्लेख 11वीं सदी में फारसी इतिहासकार अबुल-फज़ल बेहाक़ी की लेखनी में मिलता है। हालाँकि उस दौर में समोसे का स्वरूप अलग था और कहा जाता है कि गजनवी साम्राज्य के शाही दरबार में समोसे जैसी ही एक डिश सर्व की जाती थी, जिसमें कीमा और सूखे मेवे की स्टफिंग रहती थी। मोरक्कन यात्री इब्न बतूता ने भी मोहम्मद बिन तुग़लक़ के दरबार में होने वाले भव्य भोज में परोसे गए समोसे का वर्णन किया है। तब ये कीमा और मटर भरा हुआ पतली परत वाली पैस्टी जैसा हुआ करता था।
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मंगलवार, 23 फ़रवरी 2021
बहुत खास है समोसा
रविवार, 21 फ़रवरी 2021
गुदगुदी करने से क्यों आती है हँसी
अगर कोई हमें गुदगुदी करने लगे तो अपने आप हंसी आने लगती है और हंसी को कंट्रोल कर पाना भी बहुत मुश्किल हो जाता है। हम लोटपोट हो जाते हैं। लेकिन आपने सोचा है कि गुदगुदी करने पर हंसी आती क्यों है? इसके पीछे कुछ खास कारण जिम्मेदार हैं। असल में गुदगुदी ज्यादातर गले के पास, अंडरआर्म्स, पेट या फिर तलवों पर की जाती है। एक्सपर्ट बताते हैं कि ऐसी जगहों पर की गई क्रियाओं से शरीर का डिफेंस मैकेनिज्म एक्टिव हो जाता है। मतलब यह है कि गुदगुदी के समय इंसान को दिमाग से वैसे ही सिग्नल मिलते हैं, जैसे कि किसी अटैक करने वाले के सामने सरेंडर करने के टाइम होता है। ऐसा करके हमारा शरीर तनाव की स्थिति को कम कर के खुद को हर्ट होने से बचाने की कोशिश करने लगता है। इवॉल्यूशनरी बायोलॉजिस्ट और न्यूरोसाइंटिस्ट्स बताते हैं कि गुदगुदी होने पर ब्रेन का एक भाग, जिसे हाइपोथैलमस कहते हैं, हमें हंसने पर मजबूर कर देता है। यह पेनफुल सेंसेशन के पहले एक्टिव होता है। गुदगुदी से जुड़ी एक खास बात यह भी है कि
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मंगलवार, 25 सितंबर 2018
क्यों खाना चाहते हैं हम तला-भुना
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