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रविवार, 9 दिसंबर 2018

घी लगी रोटी (बाल कहानी) | kids story in hindi

राजकीय पशु विद्यालय में मध्यांतर की घंटी बजी। सभी बच्चे अपना-अपना टिफिन बॉक्स लेकर बैठ गये। पिक्कू बन्दर ने रोज की तरह आज फिर झिब्बू हाथी को चिढ़ाना शुरू किया,

“ए झिब्बू, देख मेरी रोटियाँ, घी लगी हैं...तेरी तो सूखी-सूखी”

झिब्बू की आँखें भी हमेशा की तरह भर आयीं। उसके पिता की छोटी सी किराना दुकान थी और माँ गृहिणी। मुश्किल से घर का खर्च चलाते हुए वे उसको पढ़ने भेजते थे जबकि पिक्कू बन्दर के पापा बैंक मैनेजर थे और मम्मी प्रोफेसर। आराम से जिंदगी कट रही थी। इसी बात का पिक्कू को बहुत घमंड था। वैसे तो वो सबको कुछ न कुछ टोकता फिरता था मगर झिब्बू से उसको विशेष चिढ़ थी। कारण कि झिब्बू हमेशा क्लास में प्रथम आता और शिक्षक उसकी प्रशंसा सबके सामने करते। वहीं पिक्कू किसी अन्य मेधावी छात्र को चॉकलेट, क्रीम का लालच देकर उसकी नकल करता तब भी केवल पास भर हो पाता क्योंकि अपने आलसी स्वभाव के कारण वह कई प्रश्नों के उत्तर लिखता ही नहीं था।

समय बीतता गया। पिक्कू और झिब्बू दोनों स्कूल से बढ़कर कॉलेज में आ गये। संयोगवश इसबार भी उनका नामांकन एक ही कॉलेज में हुआ था। उनकी जो कहानी स्कूल में थी, ठीक वही यहाँ भी शुरू हो गयी। कॉलेज की पढ़ाई खत्म होते-होते पिक्कू के मम्मी-पापा अपनी-अपनी नौकरियों से सेवानिवृत हो गये। उनको एकमुश्त लाखों रुपये मिले। उसी साल महाराज धिबरू शेर ने वन सेवा आयोग में नये प्रशासनिक अधिकारियों की वार्षिक नियुक्ति के लिए इच्छुक छात्र-छात्राओं को आवेदन करने का आदेश जारी किया।

शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

समझदार सलोनी (बाल कहानी) | Kids story in hindi


सलोनी का ढाबा पूरे चमचमपुर में मशहूर था। दिन-रात खुला रहता और लोग आते रहते। ढाबे के सामने ही घना जंगल था जिससे वह इलाका थोड़ा सुनसान लगता लेकिन सलोनी के हाथ की बनी तड़का दाल, रोटी और सब्जियों का स्वाद ऐसा कि चमचमपुर के महाराज भी खुद को रोक नहीं पाते। उनका आना-जाना बराबर सलोनी के ढाबे में लगा रहता था। यहाँ तक कि रात को जब वे अपनी राजकीय व्यवस्थाओं का गुप्त निरीक्षण करने वेश बदलकर निकलते तो खाना सलोनी के ढाबे पर ही खाते। उन्होंने सलोनी को अपनी बेटी सा मानना शुरू कर दिया था। सलोनी का पति सच्चामल भी बहुत सीधा व्यक्ति था। दिनभर सलोनी का हाथ बँटाता। दोनों पति-पत्नी बहुत प्यार से रहते थे। ऐसे ही उनके दिन हँसते-खेलते गुजर रहे थे।

एक रात फिर से महाराज का वहाँ आना तय हुआ। सलोनी ने उनके लिए मक्खन लगी रोटी, तड़का दाल और कटहल का कोफ्ता बनाया था। महाराज नियत समय पर सेनापति के साथ वहाँ पहुँचे। दोनों ने साधारण लोगों का वेश बनाया हुआ था। सलोनी ने उनको आदरसहित बिठाकर खाना परोसा। सच्चामल को आसपास न पाकर महाराज पूछ बैठे।

गुरुवार, 26 जुलाई 2018

दरोगा तेजा हिरण (बाल कहानी) | children's story | Kids story in hindi


टमकू सियार के घर से सुबह-सुबह रोने की आवाजें सुनकर सभी जानवर वहाँ आ पहुँचे। भिक्कू हाथी ने घबराए स्वर में पूछा,


"क्या हुआ टमकू?"

यही सवाल सुक्खू तोते और मीनू मैना ने भी किया लेकिन टमकू का रोना जारी था। पास बैठी उसकी बीवी छुमकी सियारिन भी रोए जा रही थी। अंततः गिलहरी टन्नो काकी ने थोड़ा डाँटते हुए कहा,

"अरी छुमकी, तू बताएगी नहीं तो हम तेरी समस्या का हल कैसे निकालेंगे?"

छुमकी थोड़ा सम्हली और सिसकती हुई बोली,

"काकी, ह...हमलोग कल रात एक संबंधी के यहाँ विवाह में गये हुए थे। अभी लौटे तो देखा कि अलमारी का ताला टूटा हुआ था और सारे गहने गायब हैं" इतना कहते-कहते उसने फिर सिर पकड़ लिया और जोर-जोर से रोने लगी। सबने देखा तो सचमुच अलमारी खुली हुई थी और हैंडल एक तरफ टूट के लटका हुआ था। अंदर कुछ दराजें भी खुली थीं जो अब बिल्कुल खाली थीं। सुक्खू चुपचाप गया और थाने में इस घटना की सूचना दे दी। कुछ ही मिनटों में दरोगा तेजा हिरण दल-बल के साथ वहाँ आ गया।

बुधवार, 25 जुलाई 2018

टेंगरा मछली (बाल कहानी) | Kids story in hindi

किसी गाँव में एक किसान अपनी पत्नी के साथ रहता था। कद-काठी से खूब लंबा-चौड़ा और स्वभाव से एकदम मिलनसार। सबलोग उसे पसंद करते। घर में किसी चीज की कोई कमी न थी सिवाय एक संतान के। दोनों इस कारण उदास रहते थे लेकिन बेचारे करते भी तो क्या? कई उपाय किए पर सब बेकार।

किसान रोज सुबह-सुबह नाश्ता करके अपने खेत में काम करने चला जाता और डटकर मेहनत करता। दोपहर को उसकी पत्नी खाना लेकर आती फिर दोनों वहीं साथ में खाना खाते। एकदिन किसान के जाने के बाद पत्नी खाना बनाने बैठी। आज वह मछली-चावल पकानेवाली थी। पड़ोस की मछुआरिन ताजा टेंगरा मछलियाँ दे गई थी। उसने सारी तैयारी कर ली और मछलियाँ झोले से निकालकर धोने के लिए बर्तन में रखीं। तभी अचानक बर्तन लुढ़क के गिर गया और सारी मछलियाँ बिखर गयीं। पत्नी ने जल्दी-जल्दी उनको वापस समेटा और धो, काटकर पका दिया। अबतक दोपहर हो चुकी थी। किसान को खाना देने जाने का समय हो रहा था। पत्नी आज थोड़ी थकान महसूस कर रही थी लेकिन पति को खाना देना भी जरूरी था सो उसने डिब्बा तैयार किया और उठ के खड़ी हुई। मुँह से उदास बोल फूट पड़े,